Uncategorised
यहां महर्षि उद्वालक ने की थी कठोर साधना,यहीं पर मनोरमा नदी का उद्गमस्थल, इस तरीके से शुरू हुआ कार्तिक मेला
मेरा में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

इटियाथोक,गोंडा। कहते हैं, कि जहां मन रमे, वहीं मनोरमा और जहां मन की हर इच्छा पूरी हो,वहीं मनवर है। कार्तिक पूर्णिमा पर इटियाथोक थाना क्षेत्र अंतर्गत मनवर नदी के उद्गम स्थल पर हर साल लगने वाला मेला का बड़ा महत्व है। मेले में जनपद के अलावा पड़ोसी जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं ,और पवित्र सरोवर में स्नान कर दान-पुण्य करते हैं।राम जानकी मंदिर में माथा टेककर श्रद्धालु आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।यह पवित्र स्थल ब्रह्मज्ञानी ऋषि कुमार नचिकेता के पिता महर्षि उद्दालक की तपोभूमि मानी जाती है। इसका उल्लेख महाभारत पुराण के शल्य पर्व में किया गया है।मान्यता है, कि महर्षि उद्दालक ने सरस्वती का आह्वान ‘मनोरमा’ नाम से किया था। यज्ञ से पूर्व मां सरस्वती प्रकट हुईं और अपने पावन जल से यज्ञ भूमि को पवित्र करते हुए नदी के रूप में प्रवाहित हो गईं।तीर्थ स्थल होने के बावजूद आज भी यह स्थान बदहाल है। श्रद्धालुओं की भीड़ होने के बावजूद यहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है।

*मेले में सजने लगीं दुकानें, मगर सुविधाएं नदारद*
मेले के लिए दो दिन पहले से ही दूर-दराज से मिठाई, खिलौने और प्रसाद आदि के व्यापारी अपनी दुकानें सजाने लगते हैं। मेले में सैकड़ों क्विंटल गट्टे की बिक्री होती है।इतना प्रसिद्ध मेला होने के बावजूद यहां श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए उचित व्यवस्था नहीं है।न ही शौचालय की सुविधा है।मंदिर परिसर के पास निर्माणाधीन सामुदायिक शौचालय पांच वर्ष से अधूरा पड़ा है।
