इटियाथोक,गोंडा। कार्तिक मास शुक्ल पक्ष के अक्षय नवमी पर्व पर शांति मनोरम झाली धाम आश्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। गुरुवार की सुबह अपने निर्धारित समय पर पारंपरिक परिक्रमा का शुभारंभ हुआ।श्रद्धालु आश्रम के चारों ओर करीब पांच किलोमीटर की परिधि में परिक्रमा किया।खरगूपुर नगर से लगभग तीन किलोमीटर पश्चिम स्थित इस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर अक्षय नवमी के मौके पर मेला और परिक्रमा कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।इसमें आसपास के क्षेत्रों के अलावा बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती जनपदों से भी हजारों श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालु अपने आराध्य भगवान श्रीराम, माता सीता के दर्शन पूजन कर कृतार्थ हुए।भारी भीड़ को देखते हुए खरगूपुर पुलिस प्रशासन चौकन्नी रही।मौके पर प्रकाश, पार्किंग और पेयजल की समुचित व्यवस्था की गई थी।थाना प्रभारी प्रदीप सिंह ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए मंदिर परिसर, मुख्य द्वार और परिक्रमा मार्ग पर पर्याप्त पुलिस बल, उपनिरीक्षक एवं महिला-पुरुष आरक्षियों की तैनाती की गई है, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्वक सम्पन्न कराया जा सके।
*झाली धाम आश्रम का एतिहासिक और पौराणिक महत्व*
ऐसी मान्यता है कि महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडव अपनी माता कुंती के साथ इसी क्षेत्र में कुछ समय के लिए रुके थे।बहराइच जिले के मुंडेरवा सरहदी निवासी स्वामी राम मिलन दास महाराज ने यहां 21 वर्षों तक जीवित समाधि में रहकर ईश्वर साधना की।उनके निधन के बाद आश्रम में उनकी समाधि का निर्माण किया गया,जहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है।यहां भगवान श्रीराम, माता सीता, स्वामी राम मिलन दास, भगवान शंकर और शबरी की मूर्तियां स्थापित हैं, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं। आश्रम में एक ऐसी कामधेनु गाय भी है जो बिना प्रजनन के अपने संपूर्ण जीवन प्रतिदिन दूध देती है। उसी दूध से भगवान का भोग लगता है।(रिपोर्ट नागेश्वर सिंह)
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